because I’m not an Anti-National

‘सत्ता का खेल तो चलेगा, सरकारें आएंगी जाएँगी, पार्टियां बनेंगी बिगड़ेंगी.. मगर ये देश रहना चाहिए, इस देश का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए’
-अटल बिहारी वाजपेयी

2014 में लोगों की कांग्रेस से नफ़रत को एक चेहरा मिला ‘मोदी’ और BJP को लगने लगा कि यह मोदी लहर है। जनता कांग्रेस से और कांग्रेस के घोटालों से इतनी थक चुकी थी कि उसने BJP को प्रचंड बहुमत दे दिया जिससे BJP को अहंकार हो गया।

2014 के लोक सभा के election में किये गये सारे वादे BJP ने कोने में रख दिये/ भुला दिए। ना जवानों की सुध ली, ना किसानों की, ना विद्यार्थियों की, ना कर्मचारियों की, ना महिलाओं की, ना बुजुर्गों की। सब ज़रूरी काम छोड़कर, महामहिम और उनके भक्त अंबानी की पूजा करने लग गए, statues बनवाने लग गये और हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान के वाहियात मुद्दे उठाने लगे। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश जहाँ आज़ादी के 70 साल बाद भी लोग भूखे मरते हैं, flyovers के नीचे सोते हैं, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वहाँ bullet train, statues आदि व्यर्थ ख़र्चे करने कहाँ तक सही है?

न्यायपालिका, CBI, RBI, media, election commission व अन्य integral institutions पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। जिसने भी आवाज़ उठायी वह anti-national हो गया।

students, किसानों, कर्मचारियों, जवानों सब की माँगों को न सिर्फ ठुकराया गया बल्कि उन पर लाठियां बरसायी गईं। demonetisation और GST इतनी बुरी तरह लागू किये गये कि वो ना सिर्फ फ़ेल हुए बल्कि अंतरराष्ट्रीय मज़ाक बनकर रह गए।

ऐसी कौन सी प्रगति है, ऐसा कौन सा विकास है जहाँ महँगाई आसमान छू रही है। सब्ज़ी, पेट्रोल, डीज़ल, गैस अन्य सबकी क़ीमतें आसमान छू रही हैं, रुपया गिरता जा रहा है और वो बेशर्म अब भी कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।

भले ही भारत का एक तबक़ा अनपढ़ हो लेकिन अधिकतम लोग पढ़े-लिखे युवा हैं। वो समझते हैं कि सरकार हिंदू-मुस्लिम के नाम पर उनसे खेल रही है। उन्हें रोज़गार चाहिए; दंगे नहीं।

और हमारे प्रधानमंत्री, उनकी भाषा। शर्म आती है ये कहते हुए कि वो हमारे प्रधानमंत्री हैं। ऐसे गंदे बयान कौन प्रधानमंत्री देता है। डर है कि कहीं मोदी की भाषा भारतीय राजनीति में एक नया low-level language trend ना शुरू कर दे।

इतने बड़े देश में किसी की लहर बनना नामुमकिन सा है।कांग्रेस और BJP दोनों को समझना चाहिए कि लहर किसी की नहीं है, ना थी और ना होती है। अगर इतनी ही किसी की लहर होती तो congress और BJP दोनों ही तेलंगाना में 16.8% और मिजोरम में 15% सीटों पर सिमट के ना रहती। कांग्रेस से थक कर जनता ने शासन BJP को दिया और अब BJP से थक कर जनता एक बार फिर उलटफेर करने में लगी है।

सच तो यह है कि भारत की जनता दोनों ही मुख्य पार्टियों से थक चुकी है और कोई विकल्प ढूंढ रही है परंतु देश का दुर्भाग्य है कि जनता के पास कोई विकल्प नहीं है।
2014 से जो देश में चल रहा है वह भयानक है और देश के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हो रहा है। आने वाली सरकारों को इससे सबक़ लेना चाहिए।

यहाँ कुछ भी permanent नहीं है। शायद, लोकतंत्र की यही ख़ूबसूरती है। किसी भी नेता को अपने आप को खुदा नहीं समझना चाहिए। अगर लोकतंत्र में कोई खुदा है तो वह जनता है। जब चाहे, जिसको चाहे गद्दी पे बैठा सकती है, उतार सकती है।

उनका अंजाम तुम्हे याद नहीं है शायद
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे
-डॉ. राहत इन्दौरी

PS: I don’t have any certificate though I’m not an anti-national.

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One thought on “because I’m not an Anti-National

  1. 😂😂😂😂😂😂 You Deserve To Be Called Anti National But Believe Me Man,Our Next Generation Will Laugh On You Guys.
    जो कहा करते थे,की ग़ुरूर बहुत है तुम्हें
    अपने ख़ुदा होने का
    जब हमने उनसे सबूत मांगा
    यकीन मानिए
    वो यकीन ना कर पाए
    ख़ुद के होने का
    – बाबा फरीद

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